कृष्ण जन्माष्टमी 2026: निशीथ पूजा मुहूर्त, व्रत नियम और पारण समय
शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी है। आधी रात की पूजा का समय, अष्टमी तिथि की अवधि, व्रत कैसे रखें और पारण कब करें, सब एक जगह।

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। निशीथ काल पूजा मुहूर्त रात 11:58 बजे से रात 12:14 बजे तक (16 मिनट) है, और अष्टमी तिथि रात 12:14 बजे, 5 सितंबर 2026 को समाप्त होती है। सभी समय नई दिल्ली (IST) के हैं, अन्य शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
- जन्माष्टमी का व्रत और पर्व शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को है।
- मुख्य निशीथ पूजा रात 11:58 बजे से रात 12:14 बजे तक केवल 16 मिनट की है, इसलिए तैयारी पहले से कर लें।
- अष्टमी तिथि रात 2:25 बजे, 4 सितंबर 2026 से रात 12:14 बजे, 5 सितंबर 2026 तक रहेगी।
- स्मार्त और वैष्णव परंपरा की तिथि में एक दिन का अंतर हो सकता है, इसलिए अपने संप्रदाय के पंचांग से मिलान करें।
जन्माष्टमी 2026 किस दिन है और यही दिन क्यों?
कृष्ण जन्माष्टमी शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को है। श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अमांत गणना में श्रावण) की आधी रात को माना जाता है, इसलिए वह दिन चुना जाता है जिस रात अष्टमी तिथि निशीथ काल में उपस्थित हो। इस वर्ष अष्टमी तिथि रात 2:25 बजे, 4 सितंबर 2026 को आरंभ होकर रात 12:14 बजे, 5 सितंबर 2026 को समाप्त होती है, यानी 4 सितंबर की आधी रात को अष्टमी मौजूद रहती है। सभी समय नई दिल्ली (IST) के लिए हैं, अन्य शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
निशीथ पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
निशीथ काल पूजा मुहूर्त रात 11:58 बजे से रात 12:14 बजे तक (16 मिनट), 4 सितंबर 2026 है। यह अवधि सामान्य से छोटी है क्योंकि अष्टमी तिथि ठीक रात 12:14 बजे समाप्त हो जाती है, और पूजा तिथि रहते हुए करना उत्तम माना जाता है। अभिषेक की सामग्री, वस्त्र, पालना और भोग पहले से तैयार रखें ताकि मुहूर्त के भीतर मुख्य पूजा पूरी हो सके। चंद्रोदय रात 11:24 बजे है।
इस दिन का पंचांग कैसा है?
सूर्योदय सुबह 6:01 बजे और सूर्यास्त शाम 6:40 बजे होगा। नक्षत्र रोहिणी है, जो रात 11:04 बजे, 4 सितंबर 2026 तक रहेगा, और चंद्रमा वृषभ राशि में है। योग हर्षण (दोपहर 3:44 बजे तक) और करण बालव (दोपहर 1:21 बजे तक) है। दिन में राहु काल सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक (1 घंटे 35 मिनट) है, जबकि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक (50 मिनट) रहेगा।
स्मार्त और वैष्णव जन्माष्टमी में अंतर क्यों होता है?
स्मार्त परंपरा मुख्य रूप से आधी रात की अष्टमी तिथि को देखती है, जबकि वैष्णव परंपरा रोहिणी नक्षत्र को भी महत्व देती है। इसी कारण कई वर्षों में दोनों की तिथि एक दिन आगे-पीछे हो जाती है। इस्कॉन या किसी वैष्णव संप्रदाय से जुड़े परिवार अपने मंदिर या संप्रदाय के पंचांग से तिथि की पुष्टि कर लें।
जन्माष्टमी का व्रत और पूजा कैसे करें?
भक्त दिन भर उपवास रखते हैं। आधी रात को बाल कृष्ण (लड्डू गोपाल) की मूर्ति का अभिषेक किया जाता है, उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और पालने में झुलाया जाता है। मंदिरों में भजन-कीर्तन और झांकियां सजती हैं, और महाराष्ट्र में अगले दिन दही हांडी का उत्सव होता है। व्रत में क्या खाया जाए, निर्जल रखें या फलाहार, यह परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होता है, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें।
जन्माष्टमी व्रत का पारण कब करें?
परंपरा के अनुसार व्रत आधी रात की पूजा के बाद या अगले दिन पारण के समय खोला जाता है। कौन सा तरीका अपनाना है, यह परिवार और संप्रदाय पर निर्भर करता है। अगले दिन के पारण का सटीक समय अपने शहर के स्थानीय पंचांग से देख लें। जो भक्त आधी रात को व्रत खोलते हैं, वे निशीथ पूजा (रात 11:58 बजे से रात 12:14 बजे तक) पूरी होने के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। पर्व के समय सबके लिए एक जैसे होते हैं, लेकिन यह अवधि आपके लिए व्यक्तिगत रूप से कैसी रहेगी, यह आपकी अपनी कुंडली पर निर्भर करता है, जिसे Melooha देख सकता है।
- Swiss Ephemeris (planetary data)
- Lahiri ayanamsa
- Bhagavata Purana
- Nirnaya Sindhu
Frequently Asked Questions
कृष्ण जन्माष्टमी शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को है।
निशीथ काल पूजा मुहूर्त रात 11:58 बजे से रात 12:14 बजे तक (16 मिनट), 4 सितंबर 2026 है (नई दिल्ली, IST)।
अष्टमी तिथि रात 2:25 बजे, 4 सितंबर 2026 को आरंभ होकर रात 12:14 बजे, 5 सितंबर 2026 को समाप्त होगी।
हां, 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र रात 11:04 बजे तक रहेगा, यानी निशीथ मुहूर्त से कुछ पहले समाप्त हो जाएगा।
कुछ परिवार आधी रात की पूजा के बाद व्रत खोलते हैं, कुछ अगले दिन पारण के समय। अगले दिन के पारण का सटीक समय अपने स्थानीय पंचांग से देखें।
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