राधा अष्टमी 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत नियम
शनिवार, 19 सितंबर 2026 को राधा अष्टमी है। जानिए अष्टमी तिथि का समय, अभिजीत मुहूर्त, राहु काल और पूजा का सरल तरीका।

राधा अष्टमी 2026 शनिवार, 19 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि दोपहर 1:01 बजे, 18 सितंबर 2026 से दोपहर 3:27 बजे, 19 सितंबर 2026 तक है, और 19 सितंबर को सूर्योदय के समय अष्टमी रहने से पर्व इसी दिन है। पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक (49 मिनट) है। समय नई दिल्ली (IST) के लिए हैं।
- राधा अष्टमी 2026 शनिवार, 19 सितंबर 2026 को है।
- अष्टमी तिथि दोपहर 3:27 बजे, 19 सितंबर 2026 को समाप्त होती है, इसलिए पूजा इससे पहले करना सुविधाजनक है।
- अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक है, जो दोपहर की पूजा के लिए उपयुक्त समय है।
- राहु काल सुबह 9:11 बजे से सुबह 10:43 बजे तक है, इस दौरान पूजा का आरंभ टालना परंपरा में उचित माना जाता है।
राधा अष्टमी 2026 किस दिन है और 18 नहीं, 19 सितंबर क्यों?
राधा अष्टमी भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को मनाई जाती है। 2026 में अष्टमी तिथि दोपहर 1:01 बजे, 18 सितंबर 2026 को शुरू होकर दोपहर 3:27 बजे, 19 सितंबर 2026 को समाप्त होती है। 18 सितंबर को सूर्योदय के समय अष्टमी नहीं थी, जबकि 19 सितंबर को सूर्योदय (सुबह 6:08 बजे) के समय अष्टमी तिथि विद्यमान है। उदया तिथि के नियम से पर्व शनिवार, 19 सितंबर 2026 को ही मनाया जाएगा। सभी समय नई दिल्ली (IST) के लिए हैं, अन्य शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
राधा अष्टमी 2026 पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
परंपरागत रूप से राधा जी का जन्म मध्याह्न काल में माना जाता है, इसलिए दोपहर की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक (49 मिनट) है, जो मध्याह्न पूजा के लिए अच्छा समय है। अष्टमी तिथि दोपहर 3:27 बजे समाप्त होती है, इसलिए मुख्य पूजा इससे पहले पूरी कर लें। राहु काल सुबह 9:11 बजे से सुबह 10:43 बजे तक (1 घंटे 32 मिनट) है, इसमें नया शुभ कार्य शुरू न करें। अपने शहर का सटीक समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
इस दिन का पंचांग कैसा है?
19 सितंबर 2026 को सूर्योदय सुबह 6:08 बजे और सूर्यास्त शाम 6:22 बजे है। चंद्रोदय दोपहर 1:43 बजे होगा। नक्षत्र मूल है (रात 1:43 बजे, 20 सितंबर 2026 तक), योग आयुष्मान है (दोपहर 2:29 बजे, 19 सितंबर 2026 तक) और करण बव है (दोपहर 3:28 बजे, 19 सितंबर 2026 तक)। चंद्रमा धनु राशि में रहेगा।
राधा अष्टमी की पूजा घर पर कैसे करें?
आम तौर पर लोग सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, पूजा स्थान साफ करके राधा जी और श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करते हैं। फूल, धूप, दीप, चंदन और भोग अर्पित कर राधा नाम का स्मरण और भजन-कीर्तन किया जाता है, फिर आरती होती है। पूजा की सामग्री, भोग और विधि परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होती है, इसलिए अपने घर की परंपरा या कुल पुरोहित का मार्गदर्शन मानें। बरसाना और वृंदावन में यह पर्व विशेष धूमधाम से मनाया जाता है।
राधा अष्टमी का व्रत कैसे रखें और कब खोलें?
व्रत के नियम हर परिवार में अलग होते हैं: कुछ लोग निराहार रहते हैं, कुछ फलाहार करते हैं, और कई लोग मध्याह्न पूजा के बाद व्रत खोलते हैं। व्रत खोलने का कोई एक सर्वमान्य समय नहीं है, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें। स्वास्थ्य कारणों से कठोर उपवास संभव न हो तो सात्विक और हल्का आहार लेकर भी श्रद्धा से पूजा की जा सकती है।
राधा अष्टमी का महत्व क्या है?
राधा अष्टमी को राधा रानी का प्राकट्य दिवस माना जाता है, जो जन्माष्टमी के लगभग पंद्रह दिन बाद आता है। भक्ति परंपरा में राधा जी को निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है, और मान्यता है कि उनकी आराधना से श्रीकृष्ण की भक्ति भी पूर्ण होती है। पर्व का समय शहर के सभी लोगों के लिए एक समान है, पर कोई अवधि आप पर व्यक्तिगत रूप से कैसी रहेगी, यह आपकी अपनी कुंडली पर निर्भर करता है, जिसे Melooha देख सकता है।
- Swiss Ephemeris (planetary data)
- Lahiri ayanamsa
- Padma Purana
- Brahma Vaivarta Purana
Frequently Asked Questions
राधा अष्टमी शनिवार, 19 सितंबर 2026 को है।
अष्टमी तिथि दोपहर 1:01 बजे, 18 सितंबर 2026 से दोपहर 3:27 बजे, 19 सितंबर 2026 तक है (नई दिल्ली समय)।
मध्याह्न पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक उपयुक्त है। राहु काल सुबह 9:11 बजे से सुबह 10:43 बजे तक है, इसे टालें।
18 सितंबर को अष्टमी दोपहर में शुरू होती है, पर सूर्योदय के समय अष्टमी 19 सितंबर को है, इसलिए अधिकतर पंचांगों के अनुसार पर्व 19 सितंबर को मनाया जाएगा।
कोई भी भक्त श्रद्धा से यह व्रत रख सकता है। व्रत का प्रकार और नियम परिवार और क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं, इसलिए अपनी परंपरा के अनुसार निर्णय लें।
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