कजरी तीज 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत नियम

कजरी तीज सोमवार, 31 अगस्त 2026 को है। जानिए तृतीया तिथि का समय, अभिजीत मुहूर्त, राहु काल, चंद्रोदय और व्रत से जुड़ी जरूरी बातें।

UPDATED 2026-09-265 MIN READ
सावन की हरियाली में झूले के पास नीम की डाल के सामने पूजा की थाली सजाती महिला, पीछे उगता चंद्रमा

कजरी तीज 2026 सोमवार, 31 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी, क्योंकि भाद्रपद कृष्ण तृतीया इसी दिन सूर्योदय के समय रहती है। तृतीया तिथि सुबह 9:37 बजे, 30 अगस्त 2026 से सुबह 8:51 बजे, 31 अगस्त 2026 तक है। पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक (51 मिनट) है और चंद्रोदय रात 8:25 बजे होगा (समय नई दिल्ली के लिए)।

KEY TAKEAWAYS
  • कजरी तीज का व्रत सोमवार, 31 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।
  • तृतीया तिथि सुबह 8:51 बजे, 31 अगस्त 2026 को समाप्त हो जाती है, पर उदया तिथि के नियम से व्रत इसी दिन माना जाता है।
  • राहु काल सुबह 7:34 बजे से सुबह 9:10 बजे तक है, इसलिए पूजा अभिजीत मुहूर्त में करना बेहतर माना जाता है।
  • चंद्रोदय रात 8:25 बजे है, जिसके बाद कई परिवारों में चंद्र दर्शन कर व्रत खोला जाता है।

कजरी तीज 2026 किस दिन है और यही दिन क्यों?

कजरी तीज सोमवार, 31 अगस्त 2026 को है। सभी समय नई दिल्ली के लिए (IST) हैं, अन्य शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। तृतीया तिथि सुबह 9:37 बजे, 30 अगस्त 2026 से शुरू होकर सुबह 8:51 बजे, 31 अगस्त 2026 को समाप्त होती है। 30 अगस्त को सूर्योदय के समय तृतीया नहीं थी, जबकि 31 अगस्त को सूर्योदय सुबह 5:59 बजे तृतीया में ही होता है। उदया तिथि के नियम से इसलिए व्रत 31 अगस्त को रखा जाता है। उत्तर भारत में यह पर्व सावन की पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण तृतीया को मनाया जाता है, इसलिए कुछ पंचांग इसे भाद्रपद में गिनते हैं।

कजरी तीज 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?

इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक (51 मिनट) है, जिसे दिन का शुभ समय माना जाता है। राहु काल सुबह 7:34 बजे से सुबह 9:10 बजे तक (1 घंटे 36 मिनट) रहेगा, इस दौरान पूजा का संकल्प टालना परंपरागत रूप से ठीक माना जाता है। सूर्यास्त शाम 6:44 बजे और चंद्रोदय रात 8:25 बजे है। नक्षत्र रेवती (रात 3:24 बजे, 1 सितंबर 2026 तक) और योग गण्ड (रात 1:51 बजे, 1 सितंबर 2026 तक) रहेगा। सुबह करण विष्टि (सुबह 8:52 बजे, 31 अगस्त 2026 तक) है, जिसे भद्रा भी कहते हैं, इसलिए कई लोग सुबह की पूजा इसके बाद करना पसंद करते हैं।

कजरी तीज का महत्व क्या है?

कजरी तीज को बड़ी तीज या सातुड़ी तीज भी कहा जाता है। विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य के लिए, और अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं। परंपरा में यह पर्व माता पार्वती और भगवान शिव के मिलन की कथा से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में इस दिन कजरी गीत गाने और झूला झूलने की परंपरा प्रसिद्ध है।

कजरी तीज की पूजा कैसे करें?

सामान्य रूप से व्रती सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं और शाम को माता पार्वती (कई जगह नीमड़ी माता के रूप में) की पूजा करती हैं। पूजा में कथा सुनना और रात को चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देना आम है। पूजा सामग्री, नीम की डाल की पूजा, सत्तू के पकवान और कथा का स्वरूप परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होता है, इसलिए अपने घर की परंपरा या पुरोहित की सलाह मानें।

कजरी तीज व्रत के नियम क्या हैं और व्रत कब खोलें?

कई परिवारों में यह व्रत निर्जला रखा जाता है और रात को चंद्रोदय के बाद खोला जाता है। 31 अगस्त 2026 को चंद्रोदय रात 8:25 बजे है। बादल होने पर चंद्रमा न दिखे तो कई परिवार चंद्रोदय के समय के बाद अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं। निर्जला या फलाहार, और पारण में क्या खाया जाए, यह परिवार और क्षेत्र के अनुसार बदलता है। गर्भवती महिलाएं या स्वास्थ्य समस्या वाले लोग अपनी क्षमता के अनुसार ही व्रत रखें। मुहूर्त पूरे शहर के लिए एक जैसा होता है, पर कोई अवधि आप पर व्यक्तिगत रूप से कैसे असर करती है यह आपकी अपनी कुंडली पर निर्भर है, जिसे Melooha देख सकता है।

CLASSICAL SOURCES
  • Swiss Ephemeris (planetary data)
  • Lahiri ayanamsa
  • Nirnaya Sindhu
  • Muhurta Chintamani

Frequently Asked Questions

कजरी तीज सोमवार, 31 अगस्त 2026 को है।

तृतीया सुबह 8:51 बजे, 31 अगस्त 2026 तक है और सूर्योदय सुबह 5:59 बजे इसी तिथि में होता है। उदया तिथि के नियम से पूरा दिन व्रत का माना जाता है।

नई दिल्ली में चंद्रोदय रात 8:25 बजे होगा। अपने शहर का सटीक समय स्थानीय पंचांग में देखें।

दिन में अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक है। राहु काल सुबह 7:34 बजे से सुबह 9:10 बजे तक रहेगा।

Melooha Astrology Team
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