अनंत चतुर्दशी / गणेश विसर्जन 2026: विसर्जन मुहूर्त, अनंत सूत्र और पूजा विधि

शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी: चतुर्दशी तिथि का समय, राहु काल, अभिजीत मुहूर्त और अनंत सूत्र बांधने की परंपरा एक जगह।

UPDATED 2026-09-266 MIN READ
नदी किनारे जल में उतारी जाती गणेश प्रतिमा और हाथ पर बंधा चौदह गांठों वाला लाल अनंत सूत्र

अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन 2026 में शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को है। चतुर्दशी तिथि रात 11:18 बजे, 24 सितंबर 2026 से रात 11:07 बजे, 25 सितंबर 2026 तक रहेगी, इसलिए विसर्जन इसी दिन रात 11:07 बजे से पहले पूरा करना परंपरागत है। दिन में अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक (48 मिनट) है और राहु काल सुबह 10:42 बजे से दोपहर 12:13 बजे तक है (समय नई दिल्ली, IST)।

KEY TAKEAWAYS
  • अनंत चतुर्दशी 2026 शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी, क्योंकि उस दिन सूर्योदय पर चतुर्दशी तिथि है।
  • चतुर्दशी तिथि रात 11:07 बजे, 25 सितंबर 2026 को समाप्त होगी, विसर्जन इससे पहले पूरा करना परंपरा है।
  • इस दिन भगवान विष्णु की अनंत रूप में पूजा होती है और चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र बांधा जाता है।
  • इको-फ्रेंडली विसर्जन के लिए कई शहरों में कृत्रिम तालाब बनाए जाते हैं।

अनंत चतुर्दशी 2026 किस दिन है और यही दिन क्यों?

अनंत चतुर्दशी भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को मनाई जाती है, उस दिन जब सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि हो। 2026 में चतुर्दशी तिथि रात 11:18 बजे, 24 सितंबर 2026 को शुरू होगी, यानी 24 सितंबर के सूर्योदय पर यह तिथि नहीं है। 25 सितंबर को सूर्योदय सुबह 6:11 बजे होगा और तब चतुर्दशी चल रही होगी, जो रात 11:07 बजे, 25 सितंबर 2026 तक रहेगी। इसलिए पर्व का दिन शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 है। सभी समय नई दिल्ली (IST) के हैं, अन्य शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

गणेश विसर्जन का सही समय क्या है?

परंपरा के अनुसार विसर्जन चतुर्दशी तिथि समाप्त होने से पहले पूरा किया जाता है, यानी 25 सितंबर को रात 11:07 बजे से पहले। दिन में अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक (48 मिनट) है। राहु काल सुबह 10:42 बजे से दोपहर 12:13 बजे तक (1 घंटे 31 मिनट) रहेगा, और बहुत से परिवार शुभ कार्य इस अवधि में शुरू करने से बचते हैं। सूर्यास्त शाम 6:15 बजे है। अपने शहर के सटीक चौघड़िया या विसर्जन मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग देखें।

25 सितंबर 2026 का पंचांग कैसा है?

सूर्योदय सुबह 6:11 बजे, सूर्यास्त शाम 6:15 बजे और चंद्रोदय शाम 5:23 बजे है। नक्षत्र शतभिषा सुबह 11:23 बजे, 25 सितंबर 2026 तक, योग शूल दोपहर 2:51 बजे, 25 सितंबर 2026 तक और करण गर सुबह 11:18 बजे, 25 सितंबर 2026 तक रहेगा। चंद्रमा कुंभ राशि में और सूर्य कन्या राशि में हैं।

अनंत सूत्र क्या है और इसे कैसे बांधते हैं?

इस दिन भगवान विष्णु की अनंत (अनंत, असीम) रूप में पूजा होती है। पूजा में चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र भगवान को अर्पित किया जाता है और फिर बांह पर बांधा जाता है। आम तौर पर पुरुष दाहिनी बांह पर और महिलाएं बाईं बांह पर बांधती हैं। पूजा सामग्री और सूत्र को कितने समय तक पहनना है, यह परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकता है।

अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि और व्रत कैसे करें?

कई परिवार अनंत व्रत रखते हैं और अनंत व्रत कथा पढ़ते हैं। कथा में पांडवों के कठिन समय में श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को यह व्रत रखने की सलाह देते हैं। पूजा में विष्णु का अनंत रूप में स्मरण, अनंत सूत्र अर्पण और फिर उसे धारण करना मुख्य है। व्रत के नियम, जैसे क्या खाएं और कब व्रत खोलें, हर परिवार में अलग होते हैं, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें।

गणेश विसर्जन कैसे किया जाता है?

अनंत चतुर्दशी गणेशोत्सव का अंतिम दिन है। गणेश चतुर्थी पर स्थापित प्रतिमाओं की अंतिम आरती की जाती है, मोदक और दूर्वा जैसे भोग अर्पित किए जाते हैं, फिर शोभायात्रा के साथ प्रतिमा को जल में विसर्जित किया जाता है। कई शहर इको-फ्रेंडली विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाब उपलब्ध कराते हैं, जो नदियों और झीलों को प्रदूषण से बचाते हैं। मुहूर्त पूरे शहर के लिए एक जैसा होता है, पर कोई अवधि आप पर व्यक्तिगत रूप से कैसी रहेगी, यह आपकी अपनी कुंडली पर निर्भर करता है, जिसे Melooha देख सकता है।

CLASSICAL SOURCES
  • Swiss Ephemeris (planetary data)
  • Lahiri ayanamsa
  • Bhavishya Purana

Frequently Asked Questions

गणेश विसर्जन अनंत चतुर्दशी पर शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को है।

परंपरा के अनुसार चतुर्दशी तिथि समाप्त होने से पहले, यानी रात 11:07 बजे, 25 सितंबर 2026 से पहले (नई दिल्ली समय)।

नहीं। चतुर्दशी रात 11:18 बजे, 24 सितंबर 2026 को शुरू होती है, इसलिए सूर्योदय पर चतुर्दशी वाला दिन 25 सितंबर है।

अनंत सूत्र में चौदह गांठें होती हैं। पुरुष आम तौर पर इसे दाहिनी और महिलाएं बाईं बांह पर बांधती हैं।

राहु काल सुबह 10:42 बजे से दोपहर 12:13 बजे तक (1 घंटे 31 मिनट) है।

Melooha Astrology Team
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