घर के लिए वास्तु टिप्स: कौन सी दिशा में क्या रखें
मुख्य द्वार, रसोई, बेडरूम, पूजा घर और तिजोरी के लिए वास्तु शास्त्र में बताई गई पारंपरिक दिशाएं, आसान भाषा में।

वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में, रसोई दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में और मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) में रखना शुभ माना जाता है। मुख्य द्वार के लिए उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा पारंपरिक रूप से अच्छी मानी जाती है। तिजोरी या अलमारी दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम की दीवार से सटाकर रखें ताकि उसका मुंह उत्तर की ओर खुले।
- उत्तर-पूर्व कोना सबसे हल्का, साफ और खुला रखना वास्तु का सबसे बुनियादी नियम माना जाता है।
- रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व और खाना बनाते समय पूर्व की ओर मुंह करना पारंपरिक रूप से शुभ है।
- भारी सामान और मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम में रखने से स्थिरता का भाव जुड़ा है।
- बिना तोड़फोड़ के भी साफ-सफाई, रोशनी और सही जगह पर सामान रखकर बहुत से वास्तु सुधार संभव हैं।
वास्तु में आठ दिशाओं का क्या महत्व है?
वास्तु शास्त्र घर को आठ दिशाओं में बांटकर देखता है और हर दिशा का एक स्वामी और तत्व माना गया है। उत्तर को धन और कुबेर से, पूर्व को सूर्य और स्वास्थ्य से, दक्षिण को यम और स्थिरता से, और पश्चिम को वरुण से जोड़ा जाता है। कोनों में ईशान (उत्तर-पूर्व) जल और देव तत्व का, आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) अग्नि का, नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) पृथ्वी का और वायव्य (उत्तर-पश्चिम) वायु का स्थान माना गया है। घर का बीच का हिस्सा ब्रह्मस्थान कहलाता है, जिसे खुला और हल्का रखने की सलाह दी जाती है। दिशा जांचने के लिए घर के बीच खड़े होकर कंपास का प्रयोग करें।
मुख्य द्वार किस दिशा में होना चाहिए?
मुख्य द्वार के लिए उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व दिशा पारंपरिक रूप से सबसे शुभ मानी जाती है, क्योंकि यहां से सुबह की रोशनी और ताजी हवा आती है। द्वार घर के बाकी दरवाजों से बड़ा, साफ और अच्छी रोशनी वाला हो। दरवाजे के ठीक सामने जूते, कूड़ेदान या टूटा सामान न रखें। अगर द्वार दक्षिण या पश्चिम में है तो घबराएं नहीं: वास्तु के जानकार उस दिशा के भीतर भी शुभ हिस्से बताते हैं, और साफ-सफाई तथा रोशनी से ऊर्जा बेहतर मानी जाती है।
पूजा घर कहां बनाएं?
पूजा घर के लिए उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण सबसे उत्तम माना जाता है। पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर की ओर हो तो अच्छा माना जाता है। पूजा स्थान को सीढ़ियों के नीचे, बाथरूम की दीवार से सटाकर या बेडरूम में खुले रूप में बनाने से बचने की सलाह दी जाती है। अगर अलग कमरा संभव न हो तो उत्तर-पूर्व की दीवार पर एक साफ शेल्फ भी काफी है। मूर्तियों की संख्या और आकार को लेकर परिवार और क्षेत्र के अनुसार परंपराएं अलग-अलग हैं।
रसोई किस दिशा में शुभ मानी जाती है?
रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) आदर्श मानी जाती है, क्योंकि यह अग्नि तत्व की दिशा है। दूसरा विकल्प उत्तर-पश्चिम है। गैस चूल्हा ऐसे रखें कि खाना बनाते समय मुंह पूर्व की ओर रहे। सिंक और पानी का स्थान चूल्हे से थोड़ी दूरी पर, उत्तर-पूर्व की तरफ हो तो अच्छा है, क्योंकि आग और पानी को पास-पास रखना वास्तु में ठीक नहीं माना जाता। रसोई को उत्तर-पूर्व में बनाने से बचने की सलाह दी जाती है।
बेडरूम और बिस्तर की सही दिशा क्या है?
घर के मुखिया का मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम में होना स्थिरता के लिए शुभ माना जाता है। बच्चों का कमरा पश्चिम या उत्तर-पश्चिम में, और मेहमानों का कमरा उत्तर-पश्चिम में रखा जा सकता है। सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व की ओर रखने की परंपरा है, जबकि उत्तर की ओर सिर करके सोने से बचने की बात कही जाती है। बिस्तर के ठीक सामने शीशा न रखें और बिस्तर के नीचे कबाड़ जमा न होने दें।
तिजोरी, पैसे और कीमती सामान कहां रखें?
तिजोरी या कैश अलमारी को दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम की दीवार के साथ रखें ताकि उसका दरवाजा उत्तर की ओर खुले। उत्तर दिशा कुबेर की मानी जाती है, इसलिए यह व्यवस्था धन के लिए शुभ मानी जाती है। तिजोरी के अंदर साफ-सुथरापन रखें और उसके ऊपर भारी या अव्यवस्थित सामान न रखें।
बाथरूम, सीढ़ियां और भारी सामान के लिए कौन सी दिशा ठीक है?
बाथरूम और टॉयलेट के लिए उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा उपयुक्त मानी जाती है, जबकि उत्तर-पूर्व और घर के बीच में इन्हें बनाने से बचने को कहा जाता है। सीढ़ियां दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम में हों और घड़ी की सुई की दिशा में ऊपर चढ़ें तो अच्छा माना जाता है। भारी फर्नीचर, अलमारियां और पानी की ऊपरी टंकी दक्षिण-पश्चिम में, जबकि जमीन के नीचे का पानी का टैंक या बोरिंग उत्तर-पूर्व में रखने की परंपरा है।
लिविंग रूम, स्टडी और पौधों के लिए क्या सुझाव हैं?
लिविंग रूम उत्तर या पूर्व में हो तो रोशनी और खुलापन मिलता है, और भारी सोफा दक्षिण या पश्चिम की दीवार से सटाकर रखें। पढ़ाई की मेज ऐसी हो कि पढ़ते समय मुंह पूर्व या उत्तर की ओर रहे। तुलसी का पौधा उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व में रखना शुभ माना जाता है। कांटेदार पौधे घर के अंदर रखने से बचने की सलाह दी जाती है, और सूखे या मुरझाए पौधे तुरंत हटा दें।
बिना तोड़फोड़ के वास्तु दोष कैसे कम करें?
किराए के घर या बने हुए फ्लैट में दीवारें बदलना हमेशा संभव नहीं होता। ऐसे में ये आसान उपाय अपनाए जाते हैं: उत्तर-पूर्व को खाली और साफ रखें, घर में टूटी चीजें और बंद घड़ियां न रखें, सुबह खिड़कियां खोलकर धूप आने दें, और मुख्य द्वार पर अच्छी रोशनी रखें। फर्नीचर की दिशा बदलना, जैसे बिस्तर या पढ़ाई की मेज घुमाना, अक्सर सबसे सरल सुधार होता है। ये सुझाव पारंपरिक मार्गदर्शन हैं, किसी निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं। बड़े निर्माण से पहले किसी अनुभवी वास्तु जानकार और आर्किटेक्ट दोनों की सलाह लें।
- Vastu Shastra
- Brihat Samhita
Frequently Asked Questions
उत्तर-पूर्व में टॉयलेट, रसोई, भारी अलमारी, कूड़ेदान और कबाड़ रखने से बचने की सलाह दी जाती है। इसे साफ, हल्का और रोशन रखना शुभ माना जाता है।
नहीं, केवल दक्षिण मुखी होने से घर अशुभ नहीं माना जाता। वास्तु में द्वार की सटीक स्थिति, कमरों का बंटवारा और रोशनी भी देखी जाती है।
शीशा उत्तर या पूर्व की दीवार पर लगाना पारंपरिक रूप से अच्छा माना जाता है। बिस्तर के ठीक सामने शीशा लगाने से बचें।
परंपरा के अनुसार सिर दक्षिण या पूर्व की ओर रखकर सोना अच्छा माना जाता है, और उत्तर की ओर सिर करने से बचने को कहा जाता है।
फ्लैट के बीच में खड़े होकर कंपास से दिशाएं तय करें, फिर मुख्य द्वार, रसोई, बेडरूम और टॉयलेट की दिशा मिलाएं। पूरे बिल्डिंग की बजाय अपने फ्लैट के नक्शे को आधार माना जाता है।
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