मंगल का कर्क में गोचर 2026: गोचर का समय, सभी राशियों पर प्रभाव और उपाय

18 सितंबर 2026 को मंगल कर्क राशि में प्रवेश करेगा, जहाँ यह नीच का माना जाता है, जानें सही समय, गुरु-मंगल युति और राशि अनुसार प्रभाव

UPDATED 2026-09-089 MIN READ
मंगल ग्रह का कर्क राशि में गोचर दर्शाता वैदिक ज्योतिष चार्ट, सितंबर 2026

मंगल 18 सितंबर 2026 को शाम 4:35 बजे (16:35:38 IST) मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेगा। कर्क मंगल की नीच राशि है, इसलिए यहाँ मंगल की ऊर्जा असहज और उतार-चढ़ाव भरी मानी जाती है। इसी समय गुरु पहले से कर्क राशि में 22.97 अंश पर आश्लेषा नक्षत्र में मौजूद हैं, इसलिए यह गोचर मंगल-गुरु युति के रूप में सामने आएगा। मंगल कर्क में कब तक रहेगा, इसकी सटीक तारीख उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

KEY TAKEAWAYS
  • मंगल 18 सितंबर 2026 को शाम 4:35 बजे (16:35:38 IST) मिथुन से कर्क राशि में प्रवेश करेगा।
  • कर्क मंगल की नीच राशि है, यहाँ मंगल की ऊर्जा सीधी नहीं बल्कि भावनात्मक और उलझी हुई मानी जाती है।
  • गुरु पहले से कर्क राशि में 22.97 अंश पर आश्लेषा नक्षत्र में स्थित हैं, इसलिए मंगल-गुरु युति बनने जा रही है।
  • प्रभाव हर राशि से मंगल की स्थिति वाले भाव पर निर्भर करेगा, इसलिए परिणाम सभी के लिए एक जैसे नहीं होंगे।

मंगल कर्क राशि में कब गोचर करेगा?

मंगल 18 सितंबर 2026 को शाम 4:35 बजे (सटीक समय 16:35:38 IST) पर मिथुन राशि छोड़कर कर्क राशि में प्रवेश करेगा। गोचर से ठीक पहले मंगल मिथुन राशि में 29.88 अंश पर, पुनर्वसु नक्षत्र में स्थित रहेगा, यानी यह राशि परिवर्तन मिथुन के अंतिम अंशों से होगा।

कर्क राशि में मंगल नीच का क्यों माना जाता है?

मंगल का मूल स्वभाव ऊर्जा, साहस और सीधी कार्रवाई का है, जबकि कर्क राशि चंद्रमा की राशि है और भावना, संवेदनशीलता व घरेलू जुड़ाव का प्रतीक है। इसी विरोधाभास के कारण परंपरागत ज्योतिष में कर्क को मंगल की नीच राशि माना गया है। इस गोचर में मंगल दुर्बल स्थिति में रहेगा, यानी इसकी ऊर्जा सीधे प्रकट होने के बजाय भावनात्मक उतार-चढ़ाव, चिड़चिड़ापन या निर्णयों में अनिश्चितता के रूप में सामने आ सकती है।

क्या मंगल की गुरु के साथ युति भी बन रही है?

हाँ। गोचर की तारीख पर गुरु पहले से ही कर्क राशि में 22.97 अंश पर, आश्लेषा नक्षत्र में स्थित हैं। मंगल के कर्क में प्रवेश करते ही दोनों ग्रह एक ही राशि में आ जाएँगे, जिसे परंपरागत रूप से गुरु-मंगल युति कहा जाता है। यह युति घर-परिवार, भावनात्मक निर्णयों और विस्तार की इच्छाओं को एक साथ सक्रिय कर सकती है, हालाँकि मंगल के नीच होने के कारण इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली के अनुसार अलग-अलग अनुभव हो सकता है।

मंगल कर्क राशि में कब तक रहेगा?

मंगल के कर्क राशि से अगली राशि में प्रवेश की सटीक तारीख उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है, इसलिए यहाँ कोई अनुमानित अवधि नहीं बताई जा सकती। जैसे ही अगले गोचर की पुष्टि होगी, उसे अपडेट किया जाएगा।

मेष राशि पर मंगल के कर्क गोचर का प्रभाव कैसा रहेगा?

मेष राशि से कर्क चौथा भाव है, जो घर, वाहन और माता से जुड़ा है। इस दौरान घरेलू मामलों या संपत्ति से जुड़े निर्णयों में उतार-चढ़ाव आ सकता है, परिवार में छोटी असहमति से बचने के लिए धैर्य रखना उपयोगी रहेगा।

वृषभ राशि पर मंगल के कर्क गोचर का प्रभाव कैसा रहेगा?

वृषभ से कर्क तीसरा भाव है, जो साहस, भाई-बहन और अल्प यात्राओं का भाव है। मेहनत और पहल से सफलता मिल सकती है, लेकिन आवेग में लिए गए फैसलों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।

मिथुन राशि पर मंगल के कर्क गोचर का प्रभाव कैसा रहेगा?

मिथुन से कर्क दूसरा भाव है, जो धन और वाणी से संबंधित है। खर्च बढ़ने की संभावना रहती है और वाणी में कठोरता आने से बचना चाहिए, विशेषकर परिवार के भीतर बातचीत में।

कर्क राशि पर मंगल के कर्क गोचर का प्रभाव कैसा रहेगा?

मंगल कर्क राशि वालों की स्वयं की राशि यानी प्रथम भाव में गोचर करेगा। ऊर्जा का स्तर बढ़ सकता है, लेकिन चूँकि मंगल यहाँ नीच का है, इसलिए चिड़चिड़ापन, जल्दबाजी और स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव पर ध्यान देना बेहतर रहेगा।

सिंह राशि पर मंगल के कर्क गोचर का प्रभाव कैसा रहेगा?

सिंह से कर्क बारहवाँ भाव है, जो व्यय, विदेश यात्रा और नींद से जुड़ा है। इस दौरान अनावश्यक खर्च या नींद संबंधी परेशानी हो सकती है, गुप्त शत्रुओं से भी सतर्क रहना उचित होगा।

कन्या राशि पर मंगल के कर्क गोचर का प्रभाव कैसा रहेगा?

कन्या से कर्क ग्यारहवाँ भाव है, जो लाभ और सामाजिक दायरे का भाव है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं और मित्रों या नेटवर्क से सहयोग मिलने की संभावना रहती है।

तुला राशि पर मंगल के कर्क गोचर का प्रभाव कैसा रहेगा?

तुला से कर्क दसवाँ भाव है, जो करियर और प्रतिष्ठा से जुड़ा है। कार्यक्षेत्र में मेहनत रंग ला सकती है, लेकिन अधिकारियों या वरिष्ठों के साथ टकराव से बचना जरूरी होगा।

वृश्चिक राशि पर मंगल के कर्क गोचर का प्रभाव कैसा रहेगा?

वृश्चिक से कर्क नौवाँ भाव है, जो भाग्य, पिता और धर्म-यात्रा से जुड़ा है। उच्च शिक्षा या यात्रा में प्रगति संभव है, हालाँकि लंबी यात्राओं के दौरान सावधानी बरतना उचित रहेगा।

धनु राशि पर मंगल के कर्क गोचर का प्रभाव कैसा रहेगा?

धनु से कर्क आठवाँ भाव है, जो रूपांतरण और अचानक घटनाओं का भाव माना जाता है। इस अवधि में स्वास्थ्य की नियमित जाँच और अनावश्यक जोखिम से बचना सही रहेगा।

मकर राशि पर मंगल के कर्क गोचर का प्रभाव कैसा रहेगा?

मकर से कर्क सातवाँ भाव है, जो विवाह और साझेदारी का भाव है। जीवनसाथी या व्यापारिक साझेदार के साथ मतभेद उभर सकते हैं, बातचीत में संयम रखना फायदेमंद रहेगा।

कुंभ राशि पर मंगल के कर्क गोचर का प्रभाव कैसा रहेगा?

कुंभ से कर्क छठा भाव है, जो प्रतिस्पर्धा, शत्रु और स्वास्थ्य से जुड़ा है। प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त मिल सकती है, लेकिन कानूनी मामलों और सेहत पर ध्यान देना जरूरी होगा।

मीन राशि पर मंगल के कर्क गोचर का प्रभाव कैसा रहेगा?

मीन से कर्क पाँचवाँ भाव है, जो संतान, शिक्षा और प्रेम संबंधों का भाव है। रचनात्मक कार्यों में सक्रियता बढ़ सकती है, केवल जल्दबाजी में लिए गए निर्णयों से बचना बेहतर रहेगा।

मंगल के कर्क गोचर में कौन से उपाय करने चाहिए?

चूँकि मंगल यहाँ नीच का है, परंपरागत उपायों में मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ, लाल मसूर दाल और गुड़ का दान, तथा 'ॐ अंगारकाय नमः' मंत्र का जाप शामिल किया जाता है। आवेग और गुस्से पर नियंत्रण रखना इस गोचर का सबसे व्यावहारिक उपाय माना जाता है। मूंगा जैसा मंगल से जुड़ा रत्न धारण करने से पहले पूरी कुंडली देखकर परामर्श लेना उचित रहेगा, क्योंकि मंगल यहाँ दुर्बल अवस्था में है।

CLASSICAL SOURCES
  • Brihat Parashara Hora Shastra
  • Phaladeepika
  • Swiss Ephemeris (planetary data)

Frequently Asked Questions

नहीं, प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि कर्क राशि आपकी चंद्र राशि से कौन सा भाव बनाती है। परंपरागत ज्योतिष में हर भाव का अलग फल बताया गया है, इसलिए यह गोचर सभी के लिए एक जैसा अनुभव नहीं देगा।

गोचर से ठीक पहले मंगल मिथुन राशि में पुनर्वसु नक्षत्र में स्थित रहेगा। कर्क राशि में प्रवेश के बाद मंगल की सटीक अंश स्थिति और नक्षत्र की जानकारी उपलब्ध आंकड़ों में शामिल नहीं है।

हाँ, गुरु पहले से कर्क राशि में 22.97 अंश पर आश्लेषा नक्षत्र में स्थित हैं। मंगल के 18 सितंबर 2026 को कर्क में प्रवेश करते ही दोनों ग्रह एक ही राशि में आ जाएँगे, जिसे गुरु-मंगल युति कहा जाता है।

मंगल का स्वभाव सीधा और आक्रामक है, जबकि कर्क भावना और संवेदनशीलता की राशि है। यह विरोधाभास ही मंगल को कर्क में कमजोर बनाता है, इसलिए इसे मंगल की नीच राशि कहा जाता है।

इस गोचर की समाप्ति या अगली राशि में प्रवेश की सटीक तारीख उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है, इसलिए फिलहाल इसे निश्चित रूप से नहीं बताया जा सकता।

Dr. Vineeta Chandrashekhar Phatak
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CHIEF ASTROLOGER · MELOOHA

Dr. Vineeta Chandrashekhar Phatak is a distinguished Vedic astrologer, scholar, and educator with over two decades of experience in the study and practice of Jyotish. She holds a PhD in Vedang Jyotish from K.K. Sanskrit University, with her doctoral research focused on the analytical study of Hindu marriage through Vedic astrology. A recipient of academic honours including a Gold Medal at the BA level and a Silver Medal in her M.A., Dr. Phatak has taught Jyotish at both undergraduate and postgraduate levels and has authored several books and scholarly works on Vedic astrology. She has been an astrological consultant since 2005 and has served as Chief Astrologer at Melooha since 2022, bringing together traditional Jyotish knowledge, rigorous analysis, and decades of practical experience to make astrological insights more meaningful and accessible.

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